आज गुनगुनाने को जी चाहता है
मस्ती में झूम जाने को जी चाहता है
मंजिल की तरफ़ तो बहुत चल दिए हम
आज बस यूंही चले जाने को जी चाहता है।
मस्ती में झूम जाने को जी चाहता है
मंजिल की तरफ़ तो बहुत चल दिए हम
आज बस यूंही चले जाने को जी चाहता है।
Where the path to Nirvana is shared
बीता समय, अच्छा था या बुरा, कुछ याद नहीं । क्या वोह लम्हे बरकत के थे या हरज़े के, कुछ याद नहीं ।। याद है तो बस इतना, की जिंदगी थी और हम जिंदा थे । क्यों और कैसे, उतना सब तो अब याद नहीं ।। याद करके करना भी क्या है ओ शायर, समय तो बह कर गुज़र गया । आज खड़ा है सामने हाथ बढ़ाए, की चलो कुछ नई यादें बनाएं ।। अब कोशिश हो की ऐसे जिए, की लम्हा-दर-लम्हा याद रहे । सजाए कुछ ऐसा यादों के आशियाने को, की हमारे जाने के बाद भी वोह आबाद रहे ।।